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कीर्त्योर्ध्वगीतया पुम्भिस्त्रैलोक्ये तत्र तत्र ह । प्रविष्टः कर्णरन्ध्रेषु स्त्रीणां रामः सतामिव ।। ४-२२-६३ ।।

Throughout the whole universe — in the higher, lower and middle planetary systems — Pṛthu Mahārāja’s reputation was loudly declared, and all ladies and saintly persons heard his glories, which were as sweet as the glories of Lord Rāmacandra. ।। 4-22-63 ।।

english translation

सारे ब्रह्माण्ड भर में—उच्चतर, निम्नतर तथा मध्य लोकों में—पृथु महाराज की कीर्ति उच्च स्वर से घोषित की जा रही थी। सभी महिलाओं तथा साधु पुरुषों ने उनकी महिमा को सुना जो भगवान् रामचन्द्र की महिमा के समान मधुर थी। ।। ४-२२-६३

hindi translation

kIrtyordhvagItayA pumbhistrailokye tatra tatra ha | praviSTaH karNarandhreSu strINAM rAmaH satAmiva || 4-22-63 ||

hk transliteration by Sanscript