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विदुर उवाच भवे शीलवतां श्रेष्ठे दक्षो दुहितृवत्सलः । विद्वेषमकरोत्कस्मादनादृत्यात्मजां सतीम् ।। ४-२-१ ।।

Vidura inquired: Why was Dakṣa, who was so affectionate towards his daughter, envious of Lord Śiva, who is the best among the gentle? Why did he neglect his daughter Satī? ।। 4-2-1 ।।

english translation

विदुर ने पूछा : जो दक्ष अपनी पुत्री के प्रति इतना स्नेहवान् था वह शीलवानों में श्रेष्ठतम भगवान् शिव के प्रति इतना ईर्ष्यालु क्यों था? उसने अपनी पुत्री सती का अनादर क्यों किया? ।। ४-२-१ ।।

hindi translation

vidura uvAca bhave zIlavatAM zreSThe dakSo duhitRvatsalaH | vidveSamakarotkasmAdanAdRtyAtmajAM satIm || 4-2-1 ||

hk transliteration by Sanscript