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तं सर्वलोकामरयज्ञसङ्ग्रहं त्रयीमयं द्रव्यमयं तपोमयम् । यज्ञैर्विचित्रैर्यजतो भवाय ते राजन् स्वदेशाननुरोद्धुमर्हसि ।। ४-१४-२१ ।।

Dear King, the Supreme Personality of Godhead, along with the predominating deities, is the enjoyer of the results of all sacrifices in all planets. The Supreme Lord is the sum total of the three Vedas, the owner of everything, and the ultimate goal of all austerity. Therefore your countrymen should engage in performing various sacrifices for your elevation. Indeed, you should always direct them towards the offering of sacrifices. ।। 4-14-21 ।।

english translation

हे राजन्, भगवान् प्रमुख अधिष्ठाता देवों सहित समस्त लोकों में समस्त यज्ञों के फल के भोक्ता हैं। परमेश्वर तीनों वेदों के सार रूप हैं, वे हर वस्तु के स्वामी हैं और सारी तपस्या के चरम लक्ष्य हैं। अत: आपके देशवासियों को आपकी उन्नति के लिए विविध प्रकार के यज्ञ करने चाहिए। दर असल आपको चाहिए कि आप उन्हें यज्ञ करने के लिए निर्देशित करें। ।। ४-१४-२१ ।।

hindi translation

taM sarvalokAmarayajJasaGgrahaM trayImayaM dravyamayaM tapomayam | yajJairvicitrairyajato bhavAya te rAjan svadezAnanuroddhumarhasi || 4-14-21 ||

hk transliteration by Sanscript