Śrī Mārkaṇḍeya said: O Lord Hari, I take shelter of the soles of Your lotus feet, which bestow fearlessness upon all who surrender to them. Even the great demigods are bewildered by Your illusory energy, which appears to them in the guise of knowledge. ।। 12-10-2 ।।
english translation
श्री मार्कण्डेय ने कहा: हे भगवान हरि, मैं आपके चरण कमलों का आश्रय लेता हूँ, जो उन सभी को अभय प्रदान करते हैं जो उनके प्रति समर्पण करते हैं। बड़े-बड़े देवता भी आपकी माया से मोहित हो जाते हैं, जो उन्हें ज्ञान के भेष में दिखाई देती है। ।। १२-१०-२ ।।
hindi translation
mArkaNDeya uvAca prapanno'smyaGghrimUlaM te prapannAbhayadaM hare | yanmAyayApi vibudhA muhyanti jJAnakAzayA || 12-10-2 ||