Srimad Bhagavatam

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एषा माया भगवतः सर्गस्थित्यन्तकारिणी । त्रिवर्णा वर्णितास्माभिः किं भूयः श्रोतुमिच्छसि ।। ११-३-१६ ।।

sanskrit

I have now described māyā, the illusory energy of the Supreme Personality of Godhead. This illusory potency, consisting of the three modes of material nature, is empowered by the Lord for the creation, maintenance and annihilation of the material universe. Now, what more do you wish to hear? ।। 11-3-16 ।।

english translation

मैंने अब माया का वर्णन किया है, जो कि भगवान की मायावी ऊर्जा है। भौतिक प्रकृति के तीन गुणों से युक्त यह मायावी शक्ति, भगवान द्वारा भौतिक ब्रह्मांड के निर्माण, रखरखाव और विनाश के लिए सशक्त है। अब आप और क्या सुनना चाहते हैं? ।। ११-३-१६ ।।

hindi translation

eSA mAyA bhagavataH sargasthityantakAriNI | trivarNA varNitAsmAbhiH kiM bhUyaH zrotumicchasi || 11-3-16 ||

hk transliteration by Sanscript