ततः पुनः शान्तोदितौ तुल्यप्रत्ययौ चित्तस्यैकाग्रतापरिणामः ॥३-१२॥
There (in samadhi) again (in the state of concentration) the past and the present modifications being similar it is ekagrata-parinama or mutation of the stabilised state of mind.
english translation
उसके (समाधिपरिणाम) के बाद फिर से शान्त रहने वाली व उभरने वाली ज्ञान की एक समान अवस्था चित्त की एकाग्रता परिणाम होता है ।
Just as the results of restraint, samadhi and concentration of the mind have been said in the earlier sutras in the same way in this state, the transformation of the visible characteristics, time factors and conditions of elements and senses are also described.
english translation
जिस प्रकार पहले के सूत्रों में चित्त के जो निरोध, समाधि व एकाग्रता परिणाम कहे गए हैं । उसी प्रकार सभी पंच भूतों व इन्द्रियों में होने वाले धर्म परिणाम, लक्षण परिणाम व अवस्था परिणाम भी समझे जाने चाहिए।
With the change in the sequence of Dharmi (substratum)then the result also changes.
english translation
सामान्य रूप से एक धर्मी अर्थात किसी वस्तु का जो आधार होता है उनका एक ही परिणाम होना चाहिए । परन्तु जब उस धर्मी का क्रम अर्थात अवस्था बदलती है तब उसका परिणाम भी साथ ही बदल जाता है ।