भवन्ति चात्र श्लोकाः - कृच्छ्राधिगतवित्तांश्च राजवल्लभनिष्ठुरान्। आवत्यां च तदात्वे च दूरादेव विवर्जयेत् ॥ ३७ ॥
"She must stay away from anyone from whom she can only just obtain her livelihood or from anyone who performs dirty work in the king's service, even if she can make a profit thereby."
english translation
अग्राह्य पुरुष – जिन्हें कठिनता से धन मिला हो, जो राजा को प्रसन्न करने के लिये क्रूर कर्म करते हों, उनसे तत्काल या भविष्य में अधिक लाभ की सम्भावना भी हो तब भी उनसे दूर ही रहना चाहिये ॥ ३७ ॥
hindi translation
bhavanti cAtra zlokAH - kRcchrAdhigatavittAMzca rAjavallabhaniSThurAn| AvatyAM ca tadAtve ca dUrAdeva vivarjayet || 37 ||