तत्रासमागतयोः प्रीतिलिङ्गयोतनार्थमालिङ्गनचतुष्टयम्। स्पृष्टकम्, विद्धकम्, उद्धष्टकम्, पीडितकम् इति ॥ ६ ॥
Before copulation [samagama], in order to arouse the penis with desire, the following four kinds of caress [alingana] are practiced: contact [sprishtaka], bruising [viddhaka], baring [uddhrishtaka], and squeezing [piditaka].
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जो प्रेमपात्र पहले मिले नहीं हैं, उनमें परस्पर अनुराग को द्योतित करने के लिये चार प्रकार के आलिङ्गन होते हैं- (१) स्पृष्टक, (२) विद्धक, (३) उद्धृष्टक और (४) पीड़ित ॥ ६ ॥
These four actions are known as external or preparatory acts. Each of these caresses is defined below.
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स्पृष्टक, विद्धक आदि शब्द ही अपने अभिधेय कर्म को व्यक्त कर देते हैं। अर्थात् इन पारिभाषिक शब्दों से अर्थ स्वतः विदित हो जाता है, अतएव इनकी परिभाषाएँ देने की आवश्यकता भी नहीं है ॥ ७ ॥
सम्मुखागतायां प्रयोज्यायामन्यापदेशेन गच्छतो गात्रेण गात्रस्य स्पर्शनं स्पृष्टकम् ॥ ८ ॥
Contact [sprislitaka.] It is termed contact when the boy and girl are face to face, body pressing against body, uniting the areas involved. Although in contact, there is no question of penetration.
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स्पृष्टक - किसी बहाने से आती हुई नायिका के शरीर से अपने शरीर से अपने शरीर को हुआ देना ही स्पृष्टक आलिङ्गन है ॥ ८ ॥
प्रयोज्यं स्थितमुपविष्टं वा विजने किञ्चिद् गृहती पयोधरेण विद्धयेत् । नायकोऽपि तामवपीड्य गृह्णीयादिति विद्धकम् ॥ ९ ॥
Bruising [viddbaka] In an isolated spot, finding her seated or standing, he seizes her breasts. Since the boy hurts her by catching hold of her, it is called bruising.
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विद्धक–नायिका भी जब एकान्त में खड़े या बैठे नायक को देखकर किसी वस्तु को रखने या लेने के बहाने अपने स्तनों को उससे हुआ दे और नायक भी अनुराग समझकर उसे कसकर दबाना आलिंगन है ॥ ९ ॥