तमसि जनसंबाधे विजने वाथ शनकैर्गच्छतोनांतह्रस्वकालमुद्धर्षर्ण परस्परस्य गात्राणामुद्वष्टकम् ॥। ११ ॥
Baring [uddhrishtaka] In the darkness, if people are present, or otherwise in an isolated place, they stroll slowly, showing their bodies to each other, not just for an instant, but for some time.
english translation
उष्टक - अन्धकार में भीड़भरे स्थान में अथवा निर्जन स्थान में धीरे-धीरे चलते हुए चिरकाल तक एक का शरीर दूसरे के शरीर से घर्षण करता रहे, तो उसे उदाहक कहते हैं ॥ ११ ॥
तदेव कुड्यसन्दंशेन स्तम्भसंदंशेन वा स्फुटकमवपीडयेदिति पीडितकम् ॥ १२ ॥
Squeezing [piditaka] Leaning against a wall or pillar, he presses his erect organ against her.
english translation
पीड़ितक वह उद्धटक आलिङ्गन ही यदि दीवार या स्तम्भ के सहारे हो, तो नायक और नायिका, दोनों के शरीरों के परस्पर पीड़न के कारण पीड़ितक कहलाता है अर्थात् पीड़ितक आलिङ्गन में नायक और नायिका दीवार या स्तम्भ के सहारे एक-दूसरे के शरीर को अच्छी तरह दबाते हैं ।॥ १२ ॥
hindi translation
tadeva kuDyasandaMzena stambhasaMdaMzena vA sphuTakamavapIDayediti pIDitakam || 12 ||
लतावेष्टितकं वृक्षाधिरूढकं तिलतण्डुलकं क्षीरनीरकमिति चत्वारि सम्प्रयोगकाले ।। १४ ।।
Four kinds of embrace are employed in preliminary loveplay: encircling like a liana [lataveshtitaka], climbing the tree [vrikshadhirudhaka], rice and sesame [tilatandulaka], and milk and water [kshirajalaka].
english translation
सुरत के समय चार आलिङ्गन अधिक उपयुक्त रहते हैं-लतावेष्टितक, वृक्षाधिरूडक, तिलतण्डुलक और क्षीरनीरक ।। १४ ।।
लतेव शालमावेष्टयन्ती चुम्बनार्थं मुखमवनयेत्। उद्धृत्य मन्दसीत्कृता तमाधिता वा किञ्चिद्रामणीयकं पश्येत्तल्लतावेष्टितकम् ।। १५ ।।
Encircling like a liana Encircling her lover like a liana around a sal tree [Shorea robusta], she bends her face toward him for a kiss and then withdraws with a small sigh. Assured and showing off her beauty, she seems to entwine around him like a liana.
english translation
१. लतावेष्टितक जिस प्रकार लता शाल के वृक्ष से लिपटती है, उसी प्रकार नायिका नायक से लिपटती हुई उसके मुख को चुम्बन के लिए तनिक नीचे झुकाये, उसके राग को उदीस करती हुई मन्द सीत्कार करे, अथवा उससे लिपटी हुई हो किसी रमणीय वस्तु (स्तनादि कामकेन्द्रों अथवा नायककृत नखदन्त-क्षतों आदि) का अवलोकन करे - यह लतावेष्टितक आलिङ्गन है ।। १५ ।।