In order to describe the sensual delight [ananda] of pleasure [rati], the words rasa [taste], rati [pleasure], priti [love], bhava [sensation], vega [ardor], and samapti [conclusion] are employed. And for the sexual act, sambhoga or surata [copulation], samprayoga [amorous advances], rata [coition], raha [being alone together], shayana [to sleep], and mohana [to seduce].
english translation
व्यवहार के लिए रति और रत के पर्याय बताते हैं- रस, रति, प्रीति, भाव, राग, वेग और समाप्ति- ये शब्द रति (आनन्द) के पर्याय है, और सम्प्रयोग, रत, रह (एकान्त), शयन और मोहन- ये शब्द सुरत (समागम, सम्भोग या मैथुन) के पर्याय हैं ॥ ३२ ॥
According to organ size, moment, and mood, there are nine forms of balanced sexual relations. Going outside the norm, these possibilities are so numerous that it is impossible to count them.
english translation
प्रमाण, काल और भाव से सम्पन्न रतों में प्रत्येक नौ नौ प्रकार का होने के कारण, उनके मिश्रण से बनने वाले सुरत-भेदों की संख्या इतनी अधिक हो जाती है कि गणना सम्भव नहीं है ॥ ३३ ॥
प्रथमरते चण्डवेगता शीघ्रकालता च पुरुषस्य, तद्विपरीतमुत्तरेषु योषितः पुनरेतदेव विपरीतम् । आ धातुक्षयात् ॥ ३५ ॥
On starting the act, the man's ardor is so strong that he seeks to conclude as quickly as possible, but later on, it is otherwise. In reaching sexual enjoyment, the woman's behavior is exactly the opposite.
english translation
प्रथम समागम में पुरुष चण्डवेग होता है, फलतः शीघ्र स्खलित हो जाता है, किन्तु उसी समय पुनः मैथुन करने पर पुरुष मन्दवेग हो जाता है, फलतः देर से स्खलित होता है। स्त्रियों की प्रवृत्ति इसके विपरीत होती है। अर्थात् प्रथम समागम में मन्दवेग होती हैं, फलतः देर से स्खलित होती हैं, लेकिन उसी समय पुनः मैथुन करने पर वे चण्डवेग होने से शीघ्र स्खलित हो जाती हैं। यह अपने स्थान से च्युत धातु (रज और वीर्य) के क्षय होने तक रहता है ॥ ३५ ॥
hindi translation
prathamarate caNDavegatA zIghrakAlatA ca puruSasya, tadviparItamuttareSu yoSitaH punaretadeva viparItam | A dhAtukSayAt || 35 ||