Kamasutra

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शशो वृषोऽश्व इति लिङ्गतो नायकविशेषाः । नायिका पुनर्मृगी वडवा हस्तिनी चेति ॥ १ ॥

According to the size of his sexual organ, a man is called a hare [shasha], bull [vrisha], or stallion [ashva]. The woman, according to type, is called doe [mrigi], mare [vadava], or cow-elephant [hastini].

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प्रमाण से सुरत की व्यवस्था - शिश्न की दीर्घता ( लम्बाई) के प्रमाण से नायक के शश (खरगोश), वृष (बैल) और अश्व (घोड़ा) तीन प्रकार होते हैं; और स्त्री की जननेन्द्रिय (योनि) की गहराई के प्रमाण से नायिका के मृगी (हिणी), वडवा (घोड़ी) और हस्तिनी (हथिनी) तीन प्रकार होते हैं ॥ १ ॥

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तत्र सदृशसम्प्रयोगे समरतानि त्रीणि ॥ २ ॥

Those that are matched form three balanced pairs.

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समरत — यह तीन प्रकार का होता है- १. शश नायक का मृगी नायिका के साथ, २. वृष नायक का वड़वा नायिका के साथ और ३. अश्वनायक का हस्तिनी नायिका के साथ ॥ २ ॥

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विपर्ययेण विषमाणि षट् । विषमेष्वपि पुरुषाधिक्यं चेदनन्तरसम्प्रयोगे द्वे उच्चरते। व्यवहितमेकमुच्चतररतम् । विपर्यये पुनर्द्वे नीचरते । व्यवहितमेकं नीचतररतं च। तेषु समानि श्रेष्ठानि । तरशब्दाङ्किते द्वे कनिष्ठे। शेषाणि मध्यमानि ॥ ३ ॥

On the other hand, unequal relations number six. In cases where the man is superior, there are two forms: superior and ultrasuperior coition. Similarly, there are two forms of inferior and ultrainferior coition, the rest being equal. Although it is possible to unite organs of superior or inferior size, relations between equals are preferable, the worst being the coupling of extremes. Those between intermediates are neither good nor bad.

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विषमरत-योनि और शिश्न के असमान (छोटे-बड़े) होने के कारण छह विपम रत होते हैं। विषमरत में पुरुष का शिश्न बड़ा होने पर दो उच्चरत होते हैं-वृष नायक का मृगी नायिका के साथ समागम और अश्व नायक का बड़वा नायिका के साथ समागम, इन्हें अनन्तर सम्प्रयोग भी कहा जाता है। पुरुष का शिश्न अत्यधिक बड़ा होने पर उच्चतररत होता है अश्व नायक का मृगी नायिका के साथ समागम इसमें समागम व्यवधानसहित होता है, इसलिए इसे व्यवहित सम्प्रयोग भी कहते हैं। पुरुष के शिश्न के छोटे होने पर दो नौचरत होते हैं-शश नायक का बड़वा नायिका से समागम और वृष नायक का हस्तिनी नायिका से समागम उच्चरत के समान इन्हें भी अनन्तर सम्प्रयोग कहते हैं। शिश्न के अति लघुकाय होने पर नीचतररत होता है-रात नायक का हस्तिनी नायिका के साथ समागम उच्चतररत के समान नीचतररत को भी व्यवहित सम्प्रयोग कहते हैं। इनमें सम एवं विषमरतों में समरत श्रेष्ठ है, उच्चतर एवं नीचतर ( व्यवहित सम्प्रयोग) अधम है, और शेष (उच्चरत एवं नीचरत जिन्हें अनन्तर कहा गया है) मध्यम है ॥ ३ ॥

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साम्येऽप्युच्या नीचाः इति प्रमाणतो नवरतानि ॥ ४ ॥

Relations on equal terms are preferable to those between superior and inferior organs. There are thus nine sorts of sexual relations according to size.

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नीचरत की अपेक्षा उच्चरत की श्रेष्ठता मध्यम रतों में भी नीचरत की अपेक्षा उच्चरत श्रेष्ठ हैं। इस प्रकार जननेन्द्रिय के प्रमाण के अनुसार नौ रतों का विवेचन पूर्ण हुआ ॥४॥

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यस्य सम्प्रयोगकाले प्रीतिरुदासीना वीर्यमल्पं क्षतानि च न सहते स मन्दवेगः ॥ ५ ॥

Feeble temperaments [mandavega] are those that during amorous advances show little ardor, whose semen does not flow abundantly, and who do not support being bitten, scratched, etc.

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भाव से सुरत की व्यवस्था-रमणकाल में जिसको रति-लालसा अल्प हो, बीर्य अल्प हो और जो नखक्षत, दन्तक्षत आदि को सहने में असमर्थ हो, वह मन्दवेग कहलाता है ॥ ५ ॥

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