At gatherings, an educated man should not speak solely in Sanskrit or solely in the language of the people.
english translation
इस विषय में आनुवंश्य श्लोक कहते हैं-काव्य और कलाविषयक गोष्ठियों में न अत्यन्त संस्कृत भाषा ही बोली जाये और न ठेठ देशी भाषा (स्थानीय बोली) हो, अपितु मिश्रित भाषा का प्रयोग किया जाये; क्योंकि इसी से वक्ता सर्वमान्य होता है ॥ ३७ ॥