Kamasutra
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वरं वश्यो दरिद्रोऽपि निर्गुणोऽप्यात्मधारणः । गुणैर्युक्तोऽपि न त्वेवं बहुसाधारणः पतिः ॥ ५१ ॥
It is better to take control over a husband who is a devoted young man, even poor and uninteresting, but who has just enough to live on, rather than another full of qualities but inconstant.
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एकनिष्ठ ही वरणीय चित्तवृत्ति के अनुरूप चलने वाला पति अच्छा है, भले ही वह दरिद्र ही क्यों न हो, गुणविहीन हो, केवल परिवार का पेट पालने में समर्थ (निर्धन हो, परन्तु अनेक सपत्नियों वाला, गुणसम्पन्न और धनवान् पति अच्छा नहीं ॥ ५१ ॥
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प्रायेण धनिनां दारा बहवो निरवग्रहाः । बाह्ये सत्युपभोगेऽपि निर्वित्रम्भा बहिः सुखाः ॥ ५२ ॥
The wives of the rich are often numerous and ill-controlled. They then look elsewhere for the satisfactions they cannot find at home.
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धनवान् की पत्नी बनने में दोष धनवानों के घरों में प्रायः अनेक पत्नियाँ होती हैं, किन्तु वे प्रायः सभी स्वच्छन्द हुआ करती हैं वाहन, वस्त्राभूषण आदि) तो प्राप्त होते हैं, होता ॥ ५२ ॥
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नीचो यस्त्वभियुद्धीत पुरुषः पलितोऽपि वा। विदेशगतिशीलश्च न स संयोगमर्हति॥५३॥
It is not advisable to marry a man of lowly status, even if he is cultured, or an old man, or someone who travels abroad.
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नीच, वृद्ध और प्रवासी वरणीय नहीं- यदि नीच जाति या अधम स्वभाववाला व्यक्ति, वृद्ध व्यक्ति या निरन्तर प्रवास में रहने वाला व्यक्ति भी विवाह के लिये आमन्त्रित करे तो उसे स्वीकार नहीं करना चाहिये, क्योंकि ऐसे व्यक्ति ही सम्प्रयोग के योग्य नहीं होते ॥ ५३ ॥
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यदृच्छयाभियुक्तो यो दम्भदयूताधिकोऽपि वा । सपत्नीकश्च सापत्यो न स संयोगमर्हति ॥ ५४ ॥
One should not marry anyone who only wants his own way, is violent, a trickster and gamester, or who has other wives and children.
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बलात्कारी, कपटी, जुआरी वरणीय नहीं - जो स्त्री की इच्छा न होने पर भी केवल अपनी इच्छा से सम्भोग करता है, जो कपटी और जुआरी है, और जो पत्नी और बच्चों वाला है, उससे कदापि विवाह नहीं करना चाहिये, क्योंकि ऐसा व्यक्ति सम्प्रयोग के योग्य नहीं होता ॥ ५४ ॥
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गुणसाम्येऽभियोक्तृणामेको वरयिता वरः । तत्राभियोक्तरि श्रेष्ठ्यमनुरागात्मको हि सः ॥ ५५ ॥
If she has to choose among several suitors of equal merit, she should choose the one she likes the best.
english translation
अवरणीयों में अनुरागशील ही उत्तम यदि कन्या को प्राप्त करने का प्रयास करने वाले कई व्यक्ति हों, तो कन्या उसी का वरण करे जो उससे सच्चा अनुराग रखता हो। प्रयास करने वालों में निश्छल अनुराग रखने वाला ही श्रेष्ठ होता है ॥ ५५ ॥
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