जाड्यदौःशील्यदौर्भाग्येभ्यः प्रजानुत्पत्तेराभीक्ष्ण्येन दारिकोत्पत्तेर्नायकचापलाद्वा सपत्न्यधिवेदनम् ॥ १ ॥
Because his wife is stupid, not serious-minded, or unable to have children due to barrenness, or simply because he wants a change, the hero wishes to remarry. The fact that she only produces daughters may also incite him to take another wife.
english translation
द्वितीय विवाह का कारण - मूर्खता, चरित्रहीनता, दुर्भाग्य, सन्तानहीनता, बार बार लड़कियों का उत्पन्न होना या पति की चञ्चलता के कारण पत्नी को सपत्नी की वेदना भोगनी पड़ती है ॥ १ ॥
तदादित एव भक्तिशीलवैदग्ध्यख्यापनेन परिजिहीर्षेत् । प्रजानुत्पत्तौ च स्वयमेव सापत्नके चोदयेत् ॥ २ ॥
Despite the first wife's devotion and conduct, he wishes to leave her and seeks a pretext, or else she herself, unable to have children, advises him to take another wife.
english translation
विदग्ध भार्या का कर्तव्य - भार्या को चाहिये कि वह प्रारम्भ से ही पतिभक्ति, सच्चरित्रता और विदग्धता का आचरण कर पति को दूसरा विवाह करने का अवसर ही न दे। यदि सन्तान उत्पन्न न हो, तो स्वयं ही पति को दूसरा विवाह करने के लिये प्रेरित करे ॥ २ ॥
hindi translation
tadAdita eva bhaktizIlavaidagdhyakhyApanena parijihIrSet | prajAnutpattau ca svayameva sApatnake codayet || 2 ||
आगतां चैनां भगिनीवदीक्षेत । नायकविदितं च प्रादोषिकं विधिमतीव यत्नादस्याः कारयेत्। सौभाग्यजं वैकृतमुत्सेकं वास्या नाद्रियेत ॥ ४ ॥
She shows comprehension toward the hero and treats the new wife like a younger sister. She helps her prepare for the night and does not take offense at the vanity which the happiness of being fertile causes in the other.
english translation
कनिष्ठा के साथ व्यवहार— नवपरिणीता को अपनी बहिन के समान समझे। प्रथम रात्रि में सम्भोग के लिये उसका शृङ्गार एवं शयनव्यवस्था इस तरह प्रयत्नपूर्वक करा दे जिससे उन दोनों को यह पता चले कि यह सम्पादन उसी ने किया है। यदि कनिष्ठा सौभाग्यवश अनादरपूर्वक बोले या मान दिखाये तो उसे कदापि सहन न करे ॥ ४ ॥
If the younger one neglects her duties toward her husband, she takes responsibility for it and covers up for her. The younger will then respect her and treat her favorably.
english translation
पतिविषयक प्रमाद पर उपेक्षा- यदि कनिष्ठा पतिविषयक कोई प्रमाद करे तो उसकी उपेक्षा कर दे। यदि यह समझे कि पति को प्राप्त करने के लिये यह स्वयं ही संभल जायेगी तो उसे आदरपूर्वक स्वयं समझा दे ॥ ५ ॥