योगी' याज्ञवल्क्येनोक्तम् - सव्याहृतिं सप्रणवां गायत्रीं शिरसा सह I त्रिः पठेदायतः प्राणः प्राणायामः स उच्यते ॥३-९६॥
During the retention of breath, recite gayatri for three times alongwith vyahṛtis, praṇava and siras. This is called praṇayama.
english translation
सांस रोककर रखने के दौरान व्याहृति, प्रणव और सिरस सहित तीन बार गायत्री का पाठ करें। इसे प्राणायाम कहा जाता है।
hindi translation