Astanga Hrudaya

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गुरुमन्दहिमस्निग्धश्लक्ष्णसान्द्रमृदुस्थिराः । गुणाः ससूक्ष्मविशदा विंशतिः सविपर्ययाः ॥१८॥

Guru(heavy) X laghu (light in weight) Manda(slow) X tiksna(quick,fast) Hima (cold) X ushna (hot) Snighda (unctuous) X ruksa (dry) Slaksna (smooth) X khara (rough) Sandra (solid) X drava (liquid) Mrdu (soft) X kathina (hard) Sthira (stable) X cala (moving, unstable) Suksma (stable, small) X sthula (big,gross) Vishada (non slimy) X picchila (slimy)

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गुरुवादीगुण: उपरोक्त 20 गुरुवादी गुणों को द्रव्य गुण भी कहा जाता है। इन गुणों के संबंधित विपरीत इस प्रकार हैं: 1. गुरु (भारीपन)-लघु (हल्कापन) 2. मंद (मंदता)-तीक्ष्णता (तीक्ष्णता) 3. हिम/शीत (ठंडा)-उष्ण (गर्म) 4. स्निग्ध (अस्थिरता) - रुक्ष (सूखापन) 5. श्लक्षण (चिकना) - खरा (खुरदरा) 6. सांद्र (ठोस) - द्रव (तरल) 7. मृदु (मुलायम) -कठिन (कठोर) 8. स्थिर (स्थिर)-सारा (चल) 9. सूक्ष्म (मिनट)- स्थूल (थोक) 10.विशाद(स्पष्टता)-पिचछिल(पतलापन) उपरोक्त 20 गुणों के साथ-साथ कुछ औषधियों में वायवायी और विकासी गुण भी होते हैं। व्यावायी: जो शुरू में पूरे शरीर में फैलती है और बाद में पच जाती है। विकासी: जो शरीर के ऊतकों को नुकसान पहुंचाता है और जोड़ों को ढीला कर देता है। कुछ आचार्यों ने उद्धृत किया कि व्यवयी और विकासी द्रव्य वे हैं, जिनमें क्रमशः सार (मोबाइल) और तीक्ष्ण (तीक्ष्णता) गुण शामिल हैं।

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