1.
प्रथमोऽध्यायः
Chapter 1
2.
द्वितीयोऽध्यायः
Chapter 2
3.
तृतीयोऽध्यायः
Chapter 3
4.
चतुर्थोऽध्यायः
Chapter 4
•
पञ्चमोऽध्यायः
Chapter 5
6.
षष्ठोऽध्यायः
Chapter 6
7.
सप्तमोऽध्यायः
Chapter 7
8.
अष्टमोऽध्यायः
Chapter 8
9.
नवमोऽध्यायः
Chapter 9
10.
दशमोऽध्यायः
Chapter 10
11.
एकादशोऽध्यायः
Chapter 11
12.
द्वादशोऽध्यायः
Chapter 12
13.
त्रयोदशोऽध्यायः
Chapter 13
14.
चतुर्दशोऽध्यायः
Chapter 14
15.
पञ्चदशोऽध्यायः
Chapter 15
16.
षोडशोऽध्यायः
Chapter 16
17.
सप्तदशोऽध्यायः
Chapter 17
18.
अष्टादशोऽध्यायः
Chapter 18
19.
एकोनविंशोऽध्यायः
Chapter 19
20.
विंशोऽध्यायः
Chapter 20
21.
एकविंशोऽध्यायः
Chapter 21
22.
द्वाविंशोऽध्यायः
Chapter 22
23.
त्रयोविंशोऽध्यायः
Chapter 23
24.
चतुर्विंशोऽध्यायः
Chapter 24
Progress:21.5%
श्रीशुक उवाच एवं सङ्कीर्त्य राजानं दुर्वासाः परितोषितः । ययौ विहायसाऽऽमन्त्र्य ब्रह्मलोकमहैतुकम् ।। ९-५-२२ ।।
sanskrit
Śrī Śukadeva Gosvāmī continued: Thus being satisfied in all respects, the great mystic yogī Durvāsā took permission and left, continuously glorifying the King. Through the skyways, he went to Brahmaloka, which is devoid of agnostics and dry philosophical speculators. ।। 9-5-22 ।।
english translation
श्री शुकदेव गोस्वामी ने आगे कहा : इस प्रकार सब तरह से सन्तुष्ट होकर महान् योगी दुर्वासा ने अनुमति ली और वे राजा का निरन्तर यशोगान करते हुए वहाँ से चले गये। वे आकाश मार्ग से ब्रह्मलोक गये जो शुष्क ज्ञानियों से रहित है। ।। ९-५-२२ ।।
hindi translation
zrIzuka uvAca evaM saGkIrtya rAjAnaM durvAsAH paritoSitaH | yayau vihAyasA''mantrya brahmalokamahaitukam || 9-5-22 ||
hk transliteration by SanscriptSrimad Bhagavatam
Progress:21.5%
श्रीशुक उवाच एवं सङ्कीर्त्य राजानं दुर्वासाः परितोषितः । ययौ विहायसाऽऽमन्त्र्य ब्रह्मलोकमहैतुकम् ।। ९-५-२२ ।।
sanskrit
Śrī Śukadeva Gosvāmī continued: Thus being satisfied in all respects, the great mystic yogī Durvāsā took permission and left, continuously glorifying the King. Through the skyways, he went to Brahmaloka, which is devoid of agnostics and dry philosophical speculators. ।। 9-5-22 ।।
english translation
श्री शुकदेव गोस्वामी ने आगे कहा : इस प्रकार सब तरह से सन्तुष्ट होकर महान् योगी दुर्वासा ने अनुमति ली और वे राजा का निरन्तर यशोगान करते हुए वहाँ से चले गये। वे आकाश मार्ग से ब्रह्मलोक गये जो शुष्क ज्ञानियों से रहित है। ।। ९-५-२२ ।।
hindi translation
zrIzuka uvAca evaM saGkIrtya rAjAnaM durvAsAH paritoSitaH | yayau vihAyasA''mantrya brahmalokamahaitukam || 9-5-22 ||
hk transliteration by Sanscript