1.
प्रथमोऽध्यायः
Chapter 1
2.
द्वितीयोऽध्यायः
Chapter 2
3.
तृतीयोऽध्यायः
Chapter 3
4.
चतुर्थोऽध्यायः
Chapter 4
5.
पञ्चमोऽध्यायः
Chapter 5
6.
षष्ठोऽध्यायः
Chapter 6
7.
सप्तमोऽध्यायः
Chapter 7
8.
अष्टमोऽध्यायः
Chapter 8
9.
नवमोऽध्यायः
Chapter 9
10.
दशमोऽध्यायः
Chapter 10
11.
एकादशोऽध्यायः
Chapter 11
12.
द्वादशोऽध्यायः
Chapter 12
13.
त्रयोदशोऽध्यायः
Chapter 13
14.
चतुर्दशोऽध्यायः
Chapter 14
15.
पञ्चदशोऽध्यायः
Chapter 15
16.
षोडशोऽध्यायः
Chapter 16
17.
सप्तदशोऽध्यायः
Chapter 17
18.
अष्टादशोऽध्यायः
Chapter 18
•
एकोनविंशोऽध्यायः
Chapter 19
20.
विंशोऽध्यायः
Chapter 20
21.
एकविंशोऽध्यायः
Chapter 21
22.
द्वाविंशोऽध्यायः
Chapter 22
23.
त्रयोविंशोऽध्यायः
Chapter 23
24.
चतुर्विंशोऽध्यायः
Chapter 24
Progress:75.6%
आसेवितं वर्षपूगान् षड्वर्गं विषयेषु सः । क्षणेन मुमुचे नीडं जातपक्ष इव द्विजः ।। ९-१९-२४ ।।
sanskrit
Having enjoyed sense gratification for many, many years, O King Parīkṣit, Yayāti was accustomed to it, but he gave it up entirely in a moment, just as a bird flies away from the nest as soon as its wings have grown. ।। 9-19-24 ।।
english translation
हे राजा परीक्षित, ययाति ने अनेकानेक वर्षों तक विषयवासनाओं का भोग किया, क्योंकि वे इसके आदी थे, किन्तु उन्होंने एक क्षण के भीतर अपना सर्वस्व त्याग दिया जिस तरह पंख उगते ही पक्षी अपने घोंसले से उड़ जाता है। ।। ९-१९-२४ ।।
hindi translation
AsevitaM varSapUgAn SaDvargaM viSayeSu saH | kSaNena mumuce nIDaM jAtapakSa iva dvijaH || 9-19-24 ||
hk transliteration by SanscriptSrimad Bhagavatam
Progress:75.6%
आसेवितं वर्षपूगान् षड्वर्गं विषयेषु सः । क्षणेन मुमुचे नीडं जातपक्ष इव द्विजः ।। ९-१९-२४ ।।
sanskrit
Having enjoyed sense gratification for many, many years, O King Parīkṣit, Yayāti was accustomed to it, but he gave it up entirely in a moment, just as a bird flies away from the nest as soon as its wings have grown. ।। 9-19-24 ।।
english translation
हे राजा परीक्षित, ययाति ने अनेकानेक वर्षों तक विषयवासनाओं का भोग किया, क्योंकि वे इसके आदी थे, किन्तु उन्होंने एक क्षण के भीतर अपना सर्वस्व त्याग दिया जिस तरह पंख उगते ही पक्षी अपने घोंसले से उड़ जाता है। ।। ९-१९-२४ ।।
hindi translation
AsevitaM varSapUgAn SaDvargaM viSayeSu saH | kSaNena mumuce nIDaM jAtapakSa iva dvijaH || 9-19-24 ||
hk transliteration by Sanscript