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तदीयं धनमानीय सर्वं राज्ञे न्यवेदयत् । शत्रुघ्नश्च मधोः पुत्रं लवणं नाम राक्षसम् । हत्वा मधुवने चक्रे मथुरां नाम वै पुरीम् ।। ९-११-१४ ।।

Taking all their wealth, He offered it to Lord Rāmacandra. Śatrughna also killed a Rākṣasa named Lavaṇa, who was the son of Madhu Rākṣasa. Thus He established in the great forest known as Madhuvana the town known as Mathurā. ।। 9-11-14 ।।

english translation

उन्होंने उनकी सारी सम्पत्ति छीन ली और उसे लाकर भगवान् रामचन्द्र को अर्पित कर दिया। शत्रुघ्न ने भी लवण नामक एक राक्षस का वध किया जो मधु राक्षस का पुत्र था। इस तरह उन्होंने मधुवन नामक महान् जंगल में मथुरा नामक पुरी की स्थापना की। ।। ९-११-१४ ।।

hindi translation

tadIyaM dhanamAnIya sarvaM rAjJe nyavedayat | zatrughnazca madhoH putraM lavaNaM nAma rAkSasam | hatvA madhuvane cakre mathurAM nAma vai purIm || 9-11-14 ||

hk transliteration by Sanscript