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हेतुर्जीवोऽस्य सर्गादेरविद्याकर्मकारकः । यं चानुशयिनं प्राहुरव्याकृतमुतापरे ।। १२-७-१८ ।।

Out of ignorance the living being performs material activities and thereby becomes in one sense the cause of the creation, maintenance and destruction of the universe. Some authorities call the living being the personality underlying the material creation, while others say he is the unmanifest self. ।। 12-7-18 ।।

english translation

अज्ञानतावश जीव भौतिक गतिविधियाँ करता है और इस प्रकार एक अर्थ में ब्रह्मांड की रचना, रखरखाव और विनाश का कारण बनता है। कुछ अधिकारी जीवित प्राणी को भौतिक सृष्टि का अंतर्निहित व्यक्तित्व कहते हैं, जबकि अन्य कहते हैं कि वह अव्यक्त आत्मा है। ।। १२-७-१८ ।।

hindi translation

heturjIvo'sya sargAderavidyAkarmakArakaH | yaM cAnuzayinaM prAhuravyAkRtamutApare || 12-7-18 ||

hk transliteration by Sanscript