The fact of something being mentioned in the sacred books does not mean that it can be practiced. Knowledge is universal, but practice depends on the customs of each country.
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शास्त्र की व्यापकता और प्रयोगों की एकदेशीयता- 'इस बात को शास्त्र कहता यही प्रयोगों का कारण नहीं होना चाहिये; क्योंकि शास्त्र का विषय तो व्यापक हुआ करता है, उसमें शुभ अशुभ सभी विषय वर्णित होते हैं, लेकिन प्रयोग सीमित और एकदेशीय ही हुआ करते हैं ॥ ४१ ॥
For some men, in some countries, in given circumstances or moments, this kind of sexual relationship is not without its own raison d'etre.
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विवेचन की सार्थकता कुछ ऐसे भी व्यक्ति होते हैं, कुछ ऐसे भी देश होते हैं, और कुछ ऐसा समय भी होता है जिनके लिये ये लोग निरर्थक नहीं, बल्कि उपयोगी हो हैं ॥ ४३ ॥
तस्माद्देशं च कालं च प्रयोगं शास्त्रमेव च । आत्मानं चापि संप्रेक्ष्य योगान्युञ्जीत वा न वा ॥ ४४ ॥
It is by taking into account the country, the period, custom, the injunctions of the sacred texts, as well as one's own tastes, that one decides whether or not to practice these kinds of sexual relations.
english translation
प्रयोक्ता के विचारणीय विषय-अतएव देश, काल, व्यवहार, शास्त्र और अपने को देखकर जो विधि एवं योग शिष्ट एवं ग्राह्म हों, उन्हें ही प्रयोग करें अर्थात् जो विधि एवं प्रयोग अशिष्ट एवं अग्राह्य हैं, उन्हें त्याग दे ॥ ४४ ॥
hindi translation
tasmAddezaM ca kAlaM ca prayogaM zAstrameva ca | AtmAnaM cApi saMprekSya yogAnyuJjIta vA na vA || 44 ||
Practiced according to his fantasy and in secret, who can know who, when, how, and why he does it?
english translation
यह औपरिष्टक कर्म नितान्त एकान्त में किया जाता है, और गुप्त ही रखा जाता है। मन अत्यन्त चंचल है। अतएव कौन व्यक्ति किस कारण से, कब, क्या कर डाले- इसे कौन जान सकता है ! ।। ४५ ।।
hindi translation
arthasyAsya rahasyatvAccalatvAnmanasastathA | kaH kadA kiM kutaH kuryAditi ko jJAtumarhati || 45 ||