तदेतत्तु न कार्यम्; समयविरोधादसभ्यत्वाच्च पुनरपि ह्यासां वदनसंसर्गे स्वयमेवार्तिं प्रपद्येत । इत्याचार्याः ।। २६ ।।
According to the Acharya, the masters of learning, this practice is not recommended. It is contrary to sound morals and is not a civilized practice [asabhya]. One is defiled by the contact of the sex with the face.
english translation
आचार्यों का अभिमत — इस औपरिष्टक कर्म को कदापि नहीं करना चाहिये, क्योंकि शास्त्र भी इसका निषेध करता है और यह कर्म शिष्टजन सम्मत भी नहीं है। कुलटा आदि नायिकाओं के साथ मुखमैथुन कर, पुनः रागवश मुखचुम्बन करने पर स्वयं भी दुःख होता है- ऐसा कामशास्त्र के आचार्यों का मत है ॥ २६ ॥
Vatsyayana's opinion is that for those who like prostitutes, it is not a sin, but it is better to forego doing it with other persons.
english translation
वात्स्यायन की व्यवस्था – वेश्यागामियों के लिये यह दोषपूर्ण नहीं है, इसके अतिरिक्त जो अन्य दोष कहे गये हैं, उनका भी परिहार सम्भव है—यह महर्षि वात्स्यायन का मत है ॥ २७ ॥
वेश्याभिरेव न संसृज्यन्ते आहिच्छत्रिकाः संसृष्टा अपि मुखकर्म तासां परिहरन्ति ॥ २९ ॥
The company of the women of Ahichchatra [South Panchala] should be avoided and, if one has intercourse with them, they should not be allowed to practice oral coition.
english translation
अहिच्छत्र देशवासी वेश्यागमन ही नहीं करते, और यदि कोई करता भी है, तो वह वेश्या के मुख का चुम्बन नहीं करता ॥ २९ ॥
hindi translation
vezyAbhireva na saMsRjyante AhicchatrikAH saMsRSTA api mukhakarma tAsAM pariharanti || 29 ||