Vatsyayana's opinion is that for those who like prostitutes, it is not a sin, but it is better to forego doing it with other persons.
english translation
वात्स्यायन की व्यवस्था – वेश्यागामियों के लिये यह दोषपूर्ण नहीं है, इसके अतिरिक्त जो अन्य दोष कहे गये हैं, उनका भी परिहार सम्भव है—यह महर्षि वात्स्यायन का मत है ॥ २७ ॥