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गात्राणां संसनं नेत्रनिमीलनं ब्रीडानाशः समधिका च रतियोजनेति स्त्रीणां भावलक्षणम् ॥ १७ ॥

Her limbs relaxed, glances meeting, the disappearance of all modesty, close contact, these are the characteristics of the woman who is "accessible" for sexual intercourse.

english translation

राग की विभिन्न अवस्थाएं जिसके साथ शिश्नसञ्चालन हो रहा है, उसके भाव की तीन अवस्थाएँ होती हैं प्राप्त प्रत्यासन और प्रचलित इन तीनों का लक्षण कहते हैं- शरीर का शिथिल होना, नेत्रों का बन्द कर लेना, लज्जा का नाश और मदनमन्दिर को शिश्न से सटाये रखना ये स्त्रियों के भाव-प्राप्ति के लक्षण है ॥ १७ ॥

hindi translation

gAtrANAM saMsanaM netranimIlanaM brIDAnAzaH samadhikA ca ratiyojaneti strINAM bhAvalakSaNam || 17 ||

hk transliteration by Sanscript