1.
रतावस्थापनम्
Stimulation of Erotic Desire
2.
आलिङ्गनविचारम्
Embraces
3.
चुम्बनादिविकल्पम्
Petting and Caresses
4.
नखरदानजतिम्
The art of Scratching
5.
दशनक्षतविधिप्रकरणम्
Biting
6.
संवेशनप्रकारप्रकरणम्
Methods of Penetration
7.
प्रहणनसीत्कारप्रकरणम्
Blows and Sighs
•
पुरुषायितप्रकरणम्
Virile Behaviour of Women
9.
ओपरिष्टकप्रकरणम्
Superior Coition or Fellation
10.
रतारम्भावसानिकप्रकरणम्
Preludes and Conclusions to the games of love
गात्राणां संसनं नेत्रनिमीलनं ब्रीडानाशः समधिका च रतियोजनेति स्त्रीणां भावलक्षणम् ॥ १७ ॥
Her limbs relaxed, glances meeting, the disappearance of all modesty, close contact, these are the characteristics of the woman who is "accessible" for sexual intercourse.
english translation
राग की विभिन्न अवस्थाएं जिसके साथ शिश्नसञ्चालन हो रहा है, उसके भाव की तीन अवस्थाएँ होती हैं प्राप्त प्रत्यासन और प्रचलित इन तीनों का लक्षण कहते हैं- शरीर का शिथिल होना, नेत्रों का बन्द कर लेना, लज्जा का नाश और मदनमन्दिर को शिश्न से सटाये रखना ये स्त्रियों के भाव-प्राप्ति के लक्षण है ॥ १७ ॥
hindi translation
gAtrANAM saMsanaM netranimIlanaM brIDAnAzaH samadhikA ca ratiyojaneti strINAM bhAvalakSaNam || 17 ||
hk transliteration by Sanscript