Kamasutra

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यथा हि पञ्चमीं धारामास्थाय तुरगः पथि । स्थाणुं वदरीं वापि वेगान्धो न समीक्षते ॥ एवं सुरतसम्मर्दे रागान्धी कामिनावपि। चण्डवेगी प्रवर्तते समीक्षेते न चात्ययम् ॥ ३३ ॥

Like a speed-maddened horse, flying at a gallop and seeing neither holes nor ditches, two lovers blinded by desire and making furious love do not take account of the risks involved in their conduct.

english translation

कामान्धता पर एक दृष्टान्त-जिस प्रकार पाँचवी धारागति (जब) में दौड़ता हुआ वेगान्ध अध मार्ग के स्तम्भ, गर्त (गड्ढे), खन्दक आदि को नहीं देख पाता, और विनाश को प्राप्त होता है; इसी प्रकार कामान्ध स्त्री-पुरुष चण्डवेग से सम्भोग करते हुए सुरतसम्मद (नखक्षत, दन्तक्षत, कुचमर्दन, ग्रहणन आदि) के दुष्परिणामों को नहीं सोच पाते, और विनाश (अङ्गभङ्ग या मृत्यु) को प्राप्त होते हैं ॥ ३३ ॥

hindi translation