Kamasutra
स्वप्नेष्वपि न दृश्यन्ते ते भावास्ते च विभ्रमाः । सुरतव्यवहारेषु ये स्युस्तत्क्षणकल्पिताः ॥ ३२ ॥
The fantasies a man invents under the effect of erotic excitation are not imaginable even in dreams.
english translation
समागमकाल में मनुष्य के मन और मस्तिष्क में जो जो भाव और विभ्रम उत्पन्न होते हैं, वे न तो स्वप्न में सोचे जा सकते हैं और न शास्त्र में ही कहे गये होते हैं ॥ ३२ ॥
hindi translation