भवन्ति चात्र श्लोकाः- नास्त्यत्र गणना काचिन्न च शास्त्रपरिग्रहः । प्रवृत्ते रतिसंयोगे राग एवात्र कारणम् ॥ ३१ ॥
A countless number of people are imprudent and ignorant of the rules and, driven by passion in the ardor of their erotic practices, are unable to measure the consequences.
english translation
घातक प्रहारों का कारण कामातिरेक जब पुरुष कामान्ध होकर समागम में प्रवृत्त होता है, तब वह न तो परवर्ती दुष्परिणामों की चिन्ता करता है और न शास्त्र के बन्धनों का विचार करता है। अतएव दुष्परिणामों का एकमात्र कारण उसका राग (कामातिरेक) ही हैं ॥ ३१ ॥