Kamasutra

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संवाहिकायास्तु नायकमाकारयन्त्या निद्रावशादकामाया इव तस्योववंदनस्य निधानमूरुचुम्बनं चेत्याभियोगिकानि ॥ ३१ ॥

Although she does not want to, due to sleepiness, she is affected, attracted by the look of the boy, who rests his head on her thigh and kisses it, arousing in her the desire for amorous games.

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संवाहिका की प्रेमाभिव्यक्ति यदि संवाहिका (हाथ-पैर दबाने वाली स्त्री) नायक से प्रेम करती हो, तो अपना प्रेम प्रदर्शित करने के लिये निद्रा के बहाने, उसकी जाँघ पर अपना सिर रख दे और फिर उसे चूम ले यह सब मिलन के उपाय हैं ॥ ३१ ॥

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भवति चात्र श्लोकः- कृते प्रतिकृतं कुर्यात् ताडिते प्रतिताडितम् । करणेन च तेनैव चुम्बिते प्रतिचुम्बितम् ॥ ३२ ॥

Each of the two lovers must respond action with action, blow with blow, for each activity the same activity, for each kiss a return kiss.

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इस विषय में एक आनुवंश्य श्लोक है- समागम के समय रागभाव उद्दीप्त करने के लिये नायक जो भी करे, नायिका को वही करना चाहिये। यदि नायक हस्तप्रहार करे, तो नायिका को भी उसी प्रकार हस्तप्रहार करना चाहिये, नायक जिस रीति से चुम्बन करे, नायिका को भी उसी रीति से चुम्बन करना चाहिये ॥ ३२ ॥

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