शब्दादिभ्यो बहिर्भूता या कर्माभ्यासलक्षणा । प्रीतिः साभ्यासिकी ज्ञेया मृगयादिषु कर्मसु ॥ ४० ॥
Love born from practice [abbyasa] All activities of the senses, starting with speech, require continuous practice in order to manifest themselves. Love is born of long practice, like the love of hunting for the hunter.
english translation
१. आभ्यासिकी प्रीति-शब्दादिक के अतिरिक्त कर्मों में निरन्तर लगे रहने से जो प्रीति उत्पन्न होती है, वह अभ्यास से बढ़ने के कारण आभ्यासिकी कहलाती है, जैसे मृगया (शिकार) आदि कर्मों में देखी जाती है ॥ ४० ॥