संयोगे योषितः पुंसा कण्डूतिरपनुद्यते । तच्चाभिमानसंसृष्टं सुखमित्यभिधीयते ॥ १७ ॥
"In coupling, the friction of the man's member calms the woman's excitement. But it is in signs of affection [abhimana], kissing and caressing, that she finds her pleasure."
english translation
श्वेतकेतु के मत का सारसंग्रह इस सिद्धान्त को श्वेतकेतु एक लोक में कहते हैं— पुरुषों के साथ मिलकर करने से स्त्रियों की खाज मिटती है, और आलिङ्गन, चुंबन, कुचमर्दन आदि के साथ मिलकर यही अनिर्वचनीय सुख कहलाता है ॥ १७ ॥