Chanakya Neeti
Progress:86.8%
पीतः क्रुद्धेन तातश्चरणतलहतो वल्लभो येन रोषाद् आबाल्याद्विप्रवर्यैः स्ववदनविवरे धार्यते वैरिणी मे । गेहं मे छेदयन्ति पर्तिदिवसमुमाकान्तपूजानिमित्तं तस्मात्खिन्ना सदाहं द्विजकुलनिलयं नाथ युक्तं त्यजामि ॥१६॥
लक्ष्मी माता भगवान विष्णु से कहती हैं - जिसने (ऋषि अगस्त) रुष्ट होकर मेरे पिता समुद्र (लक्ष्मीजी समुद्र से उत्पन्न हुईं थीं) को पी डाला और जिसने (ऋषि भृगु क्रोध में भर कर मेरे पति (भगवान विष्णु) के लात मारी और जो ब्राह्मण सदा लड़कपन से मेरी स्पर्धक सरस्वती की कृपा चाहते हैं तथा प्रतिदिन पार्वती के पति (भगवान शिव) की पूजा के निमित्त मेरे गृह कमलपुष को तोड़ते हैं। हे नाथ! इससे खिन्न होकर मैं उन ब्राह्मणों के घर में कभी निवास नहीं करती I
english translation
पीतः क्रुद्धेन तातश्चरणतलहतो वल्लभो येन रोषाद् आबाल्याद्विप्रवर्यैः स्ववदनविवरे धार्यते वैरिणी मे । गेहं मे छेदयन्ति पर्तिदिवसमुमाकान्तपूजानिमित्तं तस्मात्खिन्ना सदाहं द्विजकुलनिलयं नाथ युक्तं त्यजामि ॥१६॥
hindi translation
बन्धनानि खलु सन्ति बहूनि प्रेमरज्जुकृतबन्धनमन्यत। दारुभेदनिपुणोऽपि षडङ्घ्रिर्निष्क्रियो भवति पङ्कजकोशे ॥१७॥
There are many bonds, but the rope of love has a different bond. Bhramar, who is skilled in making holes even in hard wood, becomes incapable of making holes in the lotus flower.
english translation
बंधन तो अनेक हैं, परन्तु प्रेम की रस्सी का बंधन और ही है। सख्त लकड़ी में भी छेद करने में कुशल भ्रमर कमल के कोष में असमर्थ हो जाता है I
hindi translation
छिन्नोऽपि चन्दनतरुर्न जहाति गन्धं वृद्धऽपि वारणपतिर्न जहाति लीलाम। यंत्रार्पितो मधुरतां न जहाति चेक्षुः क्षीणोऽपिनत्यजतिशीलगुणानकुलीनः ॥१८॥
Just as sandalwood does not lose its fragrance even after being cut, Gajapati does not lose its luster even when an elephant grows old, sugarcane does not lose its sweetness even after being squeezed. Similarly, the noble people do not give up their advanced qualities even when they are poor.
english translation
जैसे चन्दन कट जाने पर भी अपनी महक नहीं छोड़ते, हाथी बूढा होने पर भी गजपति विलास नहीं छोड़ता, गन्ना निचोड़े जाने पर भी अपनी मधुरता नहीं छोड़ता । वैसे ही कुलीन जन दरिद्र होने पर भी अपने उन्नत गुणों को नहीं छोड़ता I
hindi translation
उर्व्यां कोऽपि महीधरो लघुतरो दोर्भ्यां धृतो लीलया तेन त्वं दिवि भूतले च सततं गोवर्धनो गीयसे । त्वां त्रैलोक्यधरं वहामि कुचयोरग्रे न तद्गण्यते किं वा केशव भाषणेन बहुना पुण्यैर्ण्यशो लभ्यते ॥१९॥
If you spontaneously hold a very small mountain in your hands on earth, you are called Govardhan both in heaven and on earth. But I, the Lord of the three worlds, hold you only in the arms of my shoulders, yet I am not counted anywhere. Hey Keshav! Needless to say a lot, fame comes from good deeds.
english translation
पृथ्वी पर किसी बहुत छोटे पर्वत को हाथों में अनायास ही धारण करने पर आप स्वर्ग और पृथ्वी दोनों में गोवर्धन कहलाते हो। परन्तु मैं तीनो लोकों के स्वामी आपको केवल कुचों के अग्रभार में धारण करता हूँ, तब भी मुझे कहीं नहीं गिना जाता। हे केशव ! बहुत कहने से क्या, पुण्यों से यश मिलता है।
hindi translation
1.
प्रथम अध्याय
Prathama Adhyaya
2.
द्वितीय अध्याय
Dvitiya Adhyaya
3.
तृतीय अध्याय
Trtiya Adhyaya
4.
चतुर्थः अध्यायः
Caturthah Adhyayah
5.
पंचम अध्याय
Pamcama Adhyaya
6.
षष्ठम् अध्याय
Sastham Adhyaya
7.
सप्तम अध्याय
Saptama Adhyaya
8.
अष्टम अध्याय
Astama Adhyaya
9.
नवम अध्याय
Navama Adhyaya
10.
दशम अध्याय
Dazama Adhyaya
11.
एकादश अध्याय
Ekadaza Adhyaya
12.
द्वादश अध्याय
Dvadaza Adhyaya
13.
त्रयोदश अध्याय
Trayodaza Adhyaya
14.
चतुर्दश अध्याय
Caturdaza Adhyaya
पञ्चदश
Pajcadaza
16.
षोडश अध्याय
Sodaza Adhyaya
17.
सप्तदश अध्याय
Saptadaza Adhyaya
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पीतः क्रुद्धेन तातश्चरणतलहतो वल्लभो येन रोषाद् आबाल्याद्विप्रवर्यैः स्ववदनविवरे धार्यते वैरिणी मे । गेहं मे छेदयन्ति पर्तिदिवसमुमाकान्तपूजानिमित्तं तस्मात्खिन्ना सदाहं द्विजकुलनिलयं नाथ युक्तं त्यजामि ॥१६॥
लक्ष्मी माता भगवान विष्णु से कहती हैं - जिसने (ऋषि अगस्त) रुष्ट होकर मेरे पिता समुद्र (लक्ष्मीजी समुद्र से उत्पन्न हुईं थीं) को पी डाला और जिसने (ऋषि भृगु क्रोध में भर कर मेरे पति (भगवान विष्णु) के लात मारी और जो ब्राह्मण सदा लड़कपन से मेरी स्पर्धक सरस्वती की कृपा चाहते हैं तथा प्रतिदिन पार्वती के पति (भगवान शिव) की पूजा के निमित्त मेरे गृह कमलपुष को तोड़ते हैं। हे नाथ! इससे खिन्न होकर मैं उन ब्राह्मणों के घर में कभी निवास नहीं करती I
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पीतः क्रुद्धेन तातश्चरणतलहतो वल्लभो येन रोषाद् आबाल्याद्विप्रवर्यैः स्ववदनविवरे धार्यते वैरिणी मे । गेहं मे छेदयन्ति पर्तिदिवसमुमाकान्तपूजानिमित्तं तस्मात्खिन्ना सदाहं द्विजकुलनिलयं नाथ युक्तं त्यजामि ॥१६॥
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बन्धनानि खलु सन्ति बहूनि प्रेमरज्जुकृतबन्धनमन्यत। दारुभेदनिपुणोऽपि षडङ्घ्रिर्निष्क्रियो भवति पङ्कजकोशे ॥१७॥
There are many bonds, but the rope of love has a different bond. Bhramar, who is skilled in making holes even in hard wood, becomes incapable of making holes in the lotus flower.
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बंधन तो अनेक हैं, परन्तु प्रेम की रस्सी का बंधन और ही है। सख्त लकड़ी में भी छेद करने में कुशल भ्रमर कमल के कोष में असमर्थ हो जाता है I
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छिन्नोऽपि चन्दनतरुर्न जहाति गन्धं वृद्धऽपि वारणपतिर्न जहाति लीलाम। यंत्रार्पितो मधुरतां न जहाति चेक्षुः क्षीणोऽपिनत्यजतिशीलगुणानकुलीनः ॥१८॥
Just as sandalwood does not lose its fragrance even after being cut, Gajapati does not lose its luster even when an elephant grows old, sugarcane does not lose its sweetness even after being squeezed. Similarly, the noble people do not give up their advanced qualities even when they are poor.
english translation
जैसे चन्दन कट जाने पर भी अपनी महक नहीं छोड़ते, हाथी बूढा होने पर भी गजपति विलास नहीं छोड़ता, गन्ना निचोड़े जाने पर भी अपनी मधुरता नहीं छोड़ता । वैसे ही कुलीन जन दरिद्र होने पर भी अपने उन्नत गुणों को नहीं छोड़ता I
hindi translation
उर्व्यां कोऽपि महीधरो लघुतरो दोर्भ्यां धृतो लीलया तेन त्वं दिवि भूतले च सततं गोवर्धनो गीयसे । त्वां त्रैलोक्यधरं वहामि कुचयोरग्रे न तद्गण्यते किं वा केशव भाषणेन बहुना पुण्यैर्ण्यशो लभ्यते ॥१९॥
If you spontaneously hold a very small mountain in your hands on earth, you are called Govardhan both in heaven and on earth. But I, the Lord of the three worlds, hold you only in the arms of my shoulders, yet I am not counted anywhere. Hey Keshav! Needless to say a lot, fame comes from good deeds.
english translation
पृथ्वी पर किसी बहुत छोटे पर्वत को हाथों में अनायास ही धारण करने पर आप स्वर्ग और पृथ्वी दोनों में गोवर्धन कहलाते हो। परन्तु मैं तीनो लोकों के स्वामी आपको केवल कुचों के अग्रभार में धारण करता हूँ, तब भी मुझे कहीं नहीं गिना जाता। हे केशव ! बहुत कहने से क्या, पुण्यों से यश मिलता है।
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