1.
प्रथमोऽध्यायः
Chapter 1
2.
द्वितीयोऽध्यायः
Chapter 2
3.
तृतीयोऽध्यायः
Chapter 3
•
चतुर्थोऽध्यायः
Chapter 4
5.
पञ्चमोऽध्यायः
Chapter 5
6.
षष्ठोऽध्यायः
Chapter 6
7.
सप्तमोऽध्यायः
Chapter 7
8.
अष्टमोऽध्यायः
Chapter 8
9.
नवमोऽध्यायः
Chapter 9
10.
दशमोऽध्यायः
Chapter 10
11.
एकादशोऽध्यायः
Chapter 11
12.
द्वादशोऽध्यायः
Chapter 12
13.
त्रयोदशोऽध्यायः
Chapter 13
14.
चतुर्दशोऽध्यायः
Chapter 14
15.
पञ्चदशोऽध्यायः
Chapter 15
16.
षोडशोऽध्यायः
Chapter 16
17.
सप्तदशोऽध्यायः
Chapter 17
18.
अष्टादशोऽध्यायः
Chapter 18
19.
एकोनविंशोऽध्यायः
Chapter 19
20.
विंशोऽध्यायः
Chapter 20
21.
एकविंशोऽध्यायः
Chapter 21
22.
द्वाविंशोऽध्यायः
Chapter 22
23.
त्रयोविंशोऽध्यायः
Chapter 23
24.
चतुर्विंशोऽध्यायः
Chapter 24
Progress:16.4%
अहो अस्य नृशंसस्य श्रियोन्मत्तस्य पश्यत । धर्मव्यतिक्रमं विष्णोरभक्तस्येशमानिनः ।। ९-४-४४ ।।
sanskrit
Alas, just see the behavior of this cruel man! He is not a devotee of Lord Viṣṇu. Being proud of his material opulence and his position, he considers himself God. Just see how he has transgressed the laws of religion. ।। 9-4-44 ।।
english translation
ओह! जरा इस निर्दय व्यक्ति का आचरण तो देखो, यह भगवान् विष्णु का भक्त नहीं है। यह अपने ऐश्वर्य एवं पद के गर्व के कारण अपने आपको ईश्वर समझ रहा है। देखो न, इसने धर्म के नियमों का उल्लंघन किया है। ।। ९-४-४४ ।।
hindi translation
aho asya nRzaMsasya zriyonmattasya pazyata | dharmavyatikramaM viSNorabhaktasyezamAninaH || 9-4-44 ||
hk transliteration by SanscriptSrimad Bhagavatam
Progress:16.4%
अहो अस्य नृशंसस्य श्रियोन्मत्तस्य पश्यत । धर्मव्यतिक्रमं विष्णोरभक्तस्येशमानिनः ।। ९-४-४४ ।।
sanskrit
Alas, just see the behavior of this cruel man! He is not a devotee of Lord Viṣṇu. Being proud of his material opulence and his position, he considers himself God. Just see how he has transgressed the laws of religion. ।। 9-4-44 ।।
english translation
ओह! जरा इस निर्दय व्यक्ति का आचरण तो देखो, यह भगवान् विष्णु का भक्त नहीं है। यह अपने ऐश्वर्य एवं पद के गर्व के कारण अपने आपको ईश्वर समझ रहा है। देखो न, इसने धर्म के नियमों का उल्लंघन किया है। ।। ९-४-४४ ।।
hindi translation
aho asya nRzaMsasya zriyonmattasya pazyata | dharmavyatikramaM viSNorabhaktasyezamAninaH || 9-4-44 ||
hk transliteration by Sanscript