When the Rajasic and Tamasic vrittis of the seeker become calm. Then his Chitta becomes pure and pure like Sphatika (a crystal gem of high quality).Then Chitta unites with soul,senses, and gross elements. This stage is known as Samapatti(engrossment).
english translation
जब साधक की राजसिक व तामसिक वृत्तियाँ शान्त हो जाती हैं । तब उसका चित्त उच्च कोटि की स्फटिक मणि के समान निर्मल व पवित्र हो जाता है । जिससे वह जीवात्मा, इन्द्रियों व पंचभूतों के स्वरूप में स्थित होकर उन्ही के जैसा हो जाता है । यह अवस्था समापत्ति कहलाती है ।
एतयैव सविचारा निर्विचारा च सूक्ष्मविषया व्याख्याता॥१-४४॥
The meaning of this sutra is the same as that of the previous sutra. The way Savitarka and Nirvitarka were described. In exactly the same way, his subtle subject has been described as Savichara and Nirvichara.
english translation
इस सूत्र का अर्थ इससे पहले वाले सूत्र के अनुसार ही है । जिस प्रकार सवितर्क और निर्वितर्क समापत्तियों का वर्णन किया गया था । ठीक उसी प्रकार से उनके सूक्ष्म विषय को सविचार और निर्विचार का वर्णन किया है ।
hindi translation
etayaiva savicArA nirvicArA ca sUkSmaviSayA vyAkhyAtA||1-44||