Continuous effort to keep the Vrittis(modifications of chitta) perfectly restrained with the help of any of these ways ( Abhyasa or Vairagya) is known as Abhyasa ( Practice).
english translation
चित्त की स्थिरता हेतु वहाँ अर्थात उन दोनों ( अभ्यास और वैराग्य ) में से किसी एक के मार्ग में किए गए प्रयत्न को अभ्यास कहते हैं।
The cessation of the desire to acquire all the objects of pleasure seen and heard, this condition is called vashikara vairagya or detachment (a type of Apara Vairagya ).
english translation
जो भी देखे हुए एवं सुने हुए विषय-भोग हैं उन सबको प्राप्त करने की इच्छा समाप्त हो जाना, इस स्थिति को ही वशीकार वैराग्य (अपर वैराग्य का एक प्रकार ) कहते हैंI