Continuous effort to keep the Vrittis(modifications of chitta) perfectly restrained with the help of any of these ways ( Abhyasa or Vairagya) is known as Abhyasa ( Practice).
english translation
चित्त की स्थिरता हेतु वहाँ अर्थात उन दोनों ( अभ्यास और वैराग्य ) में से किसी एक के मार्ग में किए गए प्रयत्न को अभ्यास कहते हैं।