अप्रत्यादेयत्वात् सर्वकार्याणां तन्मूलत्वाद्धिरण्यद इति वात्स्यायनः ॥ ६ ॥
According to Vatsyayana, anything may be obtained by giving something in exchange: the coin is the basis of every transaction.
english translation
क्योंकि सिखा (धन) अविश्वास की अवस्था में भी नहीं लौटाया जा सकता और वही सारे कार्य सम्पन्न करने का साधन है, इसलिये सिक्का देने वाला हो गम्य है-ऐसा आचार्य वात्स्यायन का मत है ॥ ६ ॥