तस्य प्रथमसमागमे प्रवासप्रत्यागमने प्रवासगमने क्रुद्धप्रसन्नायां मत्तायां च प्रयोगः । न नित्यमचण्डवेगयोः ॥ २ ॥
The nails are used for scratching and scraping in the heat of passion, or, by contrast, to show vigor when enthusiasm is lacking, or on the evening of an amorous encounter, on returning from a journey, or prior to a departure. This practice is also a sign of anger, joy, or intoxication, but it cannot be practiced in every circumstance.
english translation
समय और स्थान — प्रथम समागम में, प्रवास से लौटने पर, प्रवास पर जाते समय, मानवती नायिका के प्रसन्न होने पर और नायिका के काम या मद से उन्मत्त होने पर नखक्षतों का प्रयोग होता है। मन्दवेग नायक-नायिकाओं में इनका सदैव प्रयोग नहीं होता, अर्थात् चण्डवेग नायक-नायिका ही इसका नित्य प्रयोग कर सकते हैं ॥ २॥
hindi translation
tasya prathamasamAgame pravAsapratyAgamane pravAsagamane kruddhaprasannAyAM mattAyAM ca prayogaH | na nityamacaNDavegayoH || 2 ||
The marks left by nail imprints are of eight kinds: 1 the knife stroke [achchuritaka] 2 the half-moon [ardhachandra] 3 the circle [mandala] 4 the dash [rekha] 5 the tiger's claw [vyaghranakha] 6 the peacock's claw [mayurapadaka] 7 the hare's jump [shashaplutaka] 8 the lotus leaf [utpalapattraka].
english translation
नखक्षत के आठ भेद - (१) आच्छुरितक, (२) अर्धचन्द्र, (३) मण्डल, (४) रेखा, (५) व्याघ्रनख, (६) मयूरपदक, (७) शशप्लुतक और (८) उत्पलपत्रक ॥ ४ ॥