रागवशादेशप्रवृत्तेश्च सन्ति तानि तानि स्थानानि, न तु सर्वजनप्रयोज्यानीति वात्स्यायनः ॥ ६ ॥
Vatsyayana's opinion is that in the heat of passion, and following local custom, people lick these parts and places, which does not, however, imply that everyone should do the same.
english translation
स्थानों पर वात्स्यायन की व्यवस्था जो व्यक्ति रागवश या देशाचार के कारण जाँच आदि स्थानों का चुम्बन करते हैं, ये स्थान उन ही के चुम्बन के योग्य हैं। शिहजनों को उनका अनुकरण नहीं करना चाहिये ॥ ६ ॥
hindi translation
rAgavazAdezapravRttezca santi tAni tAni sthAnAni, na tu sarvajanaprayojyAnIti vAtsyAyanaH || 6 ||