सर्व सर्वत्र रागस्यानपेक्षितत्वात्। इति वात्स्यायनः ॥ २ ॥
Passion knows no rules, nor place, nor time, Vatsyayana declares.
english translation
चुम्बन आदि सभी उपक्रियाओं का प्रयोग शिश्नप्रवेश के पहले और बाद में सर्वत्र किया जा सकता है, क्योंकि इनके प्रयोग में नायक-नायिका दोनों के राग की अपेक्षा नहीं है यह आचार्य वात्स्यायन का मत है ॥ २ ॥