पृथक्कालत्वाद्भिन्त्रप्रयोजनत्वादसाधारणत्वान्नेति वात्स्यायनः ॥ २८ ॥
But, according to Vatsyayana, since they take place at other times, have another scope, and are an ordinary action, caresses do not belong to erotic play properly so-called.
english translation
क्योंकि संवाहन का समय आलिङ्गन (सम्भोग) काल से भिन्न है, उसका प्रयोजन थकान दूर करना है, रतिसुख देना नहीं, और संवाहन का सुख एक को मिलता है जबकि आलिङ्गन का नायक-नायिका दोनों को, फलतः संवाहन को आलिङ्गनप्रकार नहीं माना जा सकता- ऐसा आचार्य वात्स्यायन का मत है ॥ २८ ॥
Other kinds of stimulating contact exist, which are not described in the texts. They are perfectly honorable and may be practiced by those that like them.
english translation
अशास्त्रीय योग - जो योग शास्त्र में न कहे गये हों, लेकिन रागवर्धक और कामोतेजक हों, सम्भोग के समय उनका भी आदरपूर्वक प्रयोग करना चाहिये ॥ ३० ॥