शास्त्राणां विषयस्तावद्यावन्मन्दरसा नराः । रतिचक्रे प्रवृत्ते तु नैव शास्त्रं न च क्रमः ॥ ३१ ॥
The subject of this treatise does not concern men who lack a sexual temperament. The texts and methods indicated for an erotic nature are not for them. Vatsyayana has described the sixty-four arts considered to be the best introduction for love.
english translation
अशास्त्रीय योगों के उपयोग का कारण मनुष्य को शास्त्र का ज्ञान तभी तक रहता है, जब तक राग मन्द रहता है। राग के प्रचण्ड होनेपर तो मनुष्य कामान्ध हो उठता है और तब उसे न शास्त्र के ज्ञान का ध्यान रहता है और न उसमें कथित आलिङ्गन, चुम्बन आदि के क्रम का ही ॥ ३१ ॥
hindi translation
zAstrANAM viSayastAvadyAvanmandarasA narAH | raticakre pravRtte tu naiva zAstraM na ca kramaH || 31 ||