तत्र चातुःषष्टिकैयाँगैः सात्म्यानुविद्धैः सन्धुक्ष्य सन्धुक्ष्य रागं प्रवर्तत ॥ १८ ॥
Becoming gradually more excited by practicing the sixty-four positions, with common accord, a true passion [raga] grows up.
english translation
प्रवृत्ति की रीति ऐसी स्थिति में पाञ्चालिकी चतुःषष्टि के आलिङ्गन आदि योगों से जो भी देश और प्रकृति के अनुकूल पढ़ें, वासना को प्रदीप्त कर समागम में प्रवृत्त होना चाहिये ॥ १८ ॥
hindi translation
tatra cAtuHSaSTikaiyA~gaiH sAtmyAnuviddhaiH sandhukSya sandhukSya rAgaM pravartata || 18 ||