मध्यस्थरागयोरारब्धं यदनुरज्यते तदाहार्यरागम् ॥ १७ ॥
Aharyaraga, affection born of habit - Only an ordinary attraction exists to begin with, but little by little, it grows. This is desire born of force of habit.
english translation
आहार्य राग- जब नायक-नायिका में एक-दूसरे को देखकर इच्छामात्र उत्पन्न हो, तीव्र कामासक्ति न हो, तो उसे मध्यस्थ राग कहते हैं। जब मध्यस्थ राग ही उपायों द्वारा सञ्चालित होकर राग उत्पन्न कर दे तो ऐसे मिलन को आहार्य राग कहते हैं ॥ १७ ॥