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ज्ञातिकुलस्यानभिगमनमन्यत्र व्यसनोत्सवाभ्याम् । तत्रापि नायकपरिजनाधिष्ठिताया नातिकालमवस्थानमपरिवर्तितप्रवासवेषता च ।। ४५ ।।

She does not go to visit her own family, except in case of sickness or for religious festivals, and always accompanied by someone of her husband's family as witness to the purity of her trip. She must not absent herself for long. She must never go out without being accompanied.

english translation

अत्यावश्यक होने पर ही बहिर्गमन अपने माता-पिता के घर भी व्यसन (मृत्यु आदि) और उत्सव (विवाह आदि) के अतिरिक्त न जाये। वहाँ भी समुरकुल का एक व्यक्ति (देवर या ननद) साथ ले जाये और अधिक समय न लगाये तथा उत्सव में भी प्रोषित पतिकाओं जैसी सरल एवं सात्विक वेशभूषा ही धारण करे ।। ४५ ॥

hindi translation

jJAtikulasyAnabhigamanamanyatra vyasanotsavAbhyAm | tatrApi nAyakaparijanAdhiSThitAyA nAtikAlamavasthAnamaparivartitapravAsaveSatA ca || 45 ||

hk transliteration by Sanscript