Srimad Bhagavatam

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स्वरब्रह्मणि निर्भातहृषीकेशपदाम्बुजे । अखण्डं चित्तमावेश्य लोकाननुचरन् मुनिः ।। ६-५-२२ ।।

sanskrit

The seven musical notes — ṣa, ṛ, gā, ma, pa, dha and ni — are used in musical instruments, but originally they come from the Sāma Veda. The great sage Nārada vibrates sounds describing the pastimes of the Supreme Lord. By such transcendental vibrations, such as Hare Kṛṣṇa, Hare Kṛṣṇa, Kṛṣṇa Kṛṣṇa, Hare Hare/ Hare Rāma, Hare Rāma, Rāma Rāma, Hare Hare, he fixes his mind at the lotus feet of the Lord. Thus he directly perceives Hṛṣīkeśa, the master of the senses. After delivering the Haryaśvas, Nārada Muni continued traveling throughout the planetary systems, his mind always fixed at the lotus feet of the Lord. ।। 6-5-22 ।।

english translation

संगीत यंत्रों में सात स्वरों—ष, ऋ, गा, म, प, ध तथा नि का प्रयोग किया जाता है, किन्तु ये सातों स्वर मूलत: सामवेद से आये। महामुनि नारद भगवान् की लीलाओं का वर्णन करते हुए ध्वनियाँ करते हैं। ऐसी दिव्य ध्वनियों यथा हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण, हरे हरे। हरे राम, हरे राम, राम राम, हरे हरे, से वे अपने मन को भगवान् के चरणकमलों पर स्थिर करते हैं। इस तरह वे इन्द्रियों के स्वामी हृषीकेश का प्रत्यक्ष दर्शन करते हैं। हर्यश्वों का उद्धार करने के बाद नारद मुनि ने अपने मन को भगवान् के चरणकमलों में सदा स्थिर रखते हुए सारे लोकों में अपनी यात्रा जारी रखी। ।। ६-५-२२ ।।

hindi translation

svarabrahmaNi nirbhAtahRSIkezapadAmbuje | akhaNDaM cittamAvezya lokAnanucaran muniH || 6-5-22 ||

hk transliteration by Sanscript