एतेषां कविर्महावीरः सवन इति त्रय आसन्नूर्ध्वरेतसस्त आत्मविद्यायामर्भभावादारभ्य कृतपरिचयाः पारमहंस्य- मेवाश्रममभजन् ॥ ५-१-२६ ॥
Three among these ten — namely Kavi, Mahāvīra and Savana — lived in complete celibacy. Thus trained in brahmacārī life from the beginning of childhood, they were very conversant with the highest perfection, known as the paramahaṁsa-āśrama. ॥ 5-1-26 ॥
english translation
इन दस पुत्रों में से तीन—कवि, महावीर तथा सवन—पूर्ण ब्रह्मचारी रहे। इस प्रकार बालपन से ब्रह्मचर्य जीवन की शिक्षा प्राप्त करने के कारण वे सर्वोच्च सिद्धि अर्थात् परमहंस आश्रम से पूर्णतया परिचित थे। ॥ ५-१-२६ ॥
hindi translation