Shiva Purana
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हरिरुवाच ॥ शृणु दक्ष प्रवक्ष्यामि तत्त्वतः शृणु मे वचः ॥ सर्वथा ते हितकरं महामंत्रसुखप्रदम् ॥ ६ ॥
english translation
Chapter 55
Verse 5
Verse 7