1.
रतावस्थापनम्
Stimulation of Erotic Desire
2.
आलिङ्गनविचारम्
Embraces
3.
चुम्बनादिविकल्पम्
Petting and Caresses
4.
नखरदानजतिम्
The art of Scratching
5.
दशनक्षतविधिप्रकरणम्
Biting
6.
संवेशनप्रकारप्रकरणम्
Methods of Penetration
•
प्रहणनसीत्कारप्रकरणम्
Blows and Sighs
8.
पुरुषायितप्रकरणम्
Virile Behaviour of Women
9.
ओपरिष्टकप्रकरणम्
Superior Coition or Fellation
10.
रतारम्भावसानिकप्रकरणम्
Preludes and Conclusions to the games of love
रागात् प्रयोगसात्म्याच्च व्यत्ययोऽपि क्वचिद् भवेत् । न चिरं तस्य चैवान्ते प्रकृतेरेव योजनम् ॥ २३ ॥
Sometimes, out of passion, custom, or temperament, the woman inverts the situation. This is only temporary, however, and nature ends by taking back its due.
english translation
स्त्री-पुरुष के ये धर्म सार्वत्रिक नहीं हैं। राग के चरम सीमा पर पहुँचने पर या देश, काल और प्रकृति की अनुकूलता से उसकी विपरीतता भी देखी जाती है, अर्थात् इन स्थितियों में स्त्री अपने सहज धर्म-सुकुमारता और सलज्जता को छोड़कर और पुरुष जैसा कठोर बनकर, अपहस्तक आदि का वार कर सकती है, लेकिन यह विपरीतता अधिक समय तक नहीं चलती, और अन्त में दोनों प्रकृतिस्थ हो जाते हैं ॥ २३ ॥
hindi translation
rAgAt prayogasAtmyAcca vyatyayo'pi kvacid bhavet | na ciraM tasya caivAnte prakRtereva yojanam || 23 ||
hk transliteration by Sanscript