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रागात् प्रयोगसात्म्याच्च व्यत्ययोऽपि क्वचिद् भवेत् । न चिरं तस्य चैवान्ते प्रकृतेरेव योजनम् ॥ २३ ॥

Sometimes, out of passion, custom, or temperament, the woman inverts the situation. This is only temporary, however, and nature ends by taking back its due.

english translation

स्त्री-पुरुष के ये धर्म सार्वत्रिक नहीं हैं। राग के चरम सीमा पर पहुँचने पर या देश, काल और प्रकृति की अनुकूलता से उसकी विपरीतता भी देखी जाती है, अर्थात् इन स्थितियों में स्त्री अपने सहज धर्म-सुकुमारता और सलज्जता को छोड़कर और पुरुष जैसा कठोर बनकर, अपहस्तक आदि का वार कर सकती है, लेकिन यह विपरीतता अधिक समय तक नहीं चलती, और अन्त में दोनों प्रकृतिस्थ हो जाते हैं ॥ २३ ॥

hindi translation

rAgAt prayogasAtmyAcca vyatyayo'pi kvacid bhavet | na ciraM tasya caivAnte prakRtereva yojanam || 23 ||

hk transliteration by Sanscript