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देशसात्म्यात् प्रकृतिसात्म्यं बलीय इति सुवर्णनाभः । न तत्र देश्या उपचाराः ।। ३४ ।।

According to Suvarnanabha, it is more important to follow one's nature than local custom as far as kisses, embraces, scratches, and bites are concerned.

english translation

देशसात्म्य से प्रकृतिसात्म्य की महत्ता देशाचार से व्यक्ति को प्रकृति और प्रवृत्ति अधिक बलवान् है, अतएव व्यक्ति को प्रकृति और प्रवृत्ति के विरुद्ध देशाचार नहीं अपनाना चाहिये- ऐसा आचार्य सुवर्णनाभ का मत है ।। ३४ ।।

hindi translation

dezasAtmyAt prakRtisAtmyaM balIya iti suvarNanAbhaH | na tatra dezyA upacArAH || 34 ||

hk transliteration by Sanscript