कथं हि समानायामेवाकृतावेकार्थमभिप्रपन्नयोः कार्यवैलक्षण्यं स्यात् ? ।। २४ ।।
How is it possible for two beings belonging to the same species and practicing the same act not to feel the same pleasure?
english translation
स्त्री-पुरुष के सुख की अभिन्नता समान जाति और समान कार्य में संलग्न स्त्री- पुरुष का सुख परस्पर भिन्न कैसे हो सकता है? अर्थात् दोनों का सुख परस्पर अभिन्न ही होगा ? ॥ २४ ॥
hindi translation
kathaM hi samAnAyAmevAkRtAvekArthamabhiprapannayoH kAryavailakSaNyaM syAt ? || 24 ||